BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

रिमझिम सावन



लगाये झड़ी
रिमझिम सावन
अँखियाँ बूढी

बादल दिखे
हरियाली सपने
आँखों में चीखे

लौटा सावन
लौटेंगी बहारे भी
उम्मीदें हरी

सावन मास
तांडव नृत्य कहीं
रचता रास

सावनी घटा
बेशकीमती रत्न
वृथा न लुटा

श्रावणी मेले
याद आये  बाबुल
गोदी के झूले

मनाती तीज
चुनड हरी ओढ़े
रूपसी मही 

हुयी जवान
नदिया बरसाती
हदें तोड़ती

सावनी घटा
ठहर कुछ पल
राहो में पिया

फिर बरसी

वादों की बदरिया

जनता प्यासी



वादों के मेघ

बरसे रुक रुक

भीगे है देश 


भूखी जनता

वादों  की रोटी सेंके

देश के नेता



कल का वादा

बीत गए बरसों

आज भी ताजा