BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

चंदा रे सुन जरा







तुम हो चाँद
मैं चाँदनी  तुम्हारी
सदैव साथ
अद्भुत दृश्य
चन्दा जो देखे चाँद
दोनों जले रे 

दो दो है चाँद .... !!!
भर्मायी  सकुचाई
पिया निहारूं 

चाँद मचला
छूने चला सरिता
चांदनी संग

भर आगोश
सरिता निहारती
प्रिय का रूप

चंदा ठहर 
अंखियों में बसा लूँ
पिया की छवि 

 ना चाहूँ पिया 
और कुछ श्रृंगार
तुम हो साथ 


लौटा दो मुझे
ओ छलिया अम्बर 
वो चाँद मेरा

तके नयन
रंगे पिया  के रंग
चौथ का चाँद 

चाँद निगोड़ा
उतरा है झील में
धोये मुखड़ा

चोर मयंक
नहा रहा झील में
धोये कलंक

रूठा है चाँद
मना  रही है मैया
भरती अंक


कलियाँ खिली 
पहनाये चाँदनी
चनिया चोली