BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

मंगलवार, 7 मई 2013

हरसिंगार/ उड़ान;.... तांका


हरसिंगार
1
नि:शब्द निशा
चटकता यौवन
महकी हवा
अभिसारिका धरा
स्तब्ध निहारे  उषा ।

उड़ान

2
सजे नभ पे
तेरे नैनो के मोती
चन्द्रहार -से
चुग लाता मैं यदि
छू पाता वो आकाश ।

3
ऊँची उड़ान
नशा कामयाबी का
अरे नादान
बेबस ऑंखें तकें
घर  जा परिंदे 

ये सभी तांका  त्रिवेणी में प्रकाशित हो चुके है।जिसका लिंक यहाँ दिया जा रहा है।
http://trivenni.blogspot.in/2013/05/blog-post_7.html

अँसुवन की पाती


1
मेघ ले जाना,
अँसुवन की पाती
पिया के देश ।
2
चंदा ठहर
बसा लूँ अँखियों मे
पिया की छवि 
3
स्वर्ण शृंगार
बना स्वर्णिम याद
सजूँ कैसे मैं ???
4
पी का संदेशा
सुना गए बदरा
झूमे मनवा ।
5
सदियाँ बीतें
धूमिल नहीं होते
स्वर्णिम पल ।
6
हार के जीती
जीत के हारी  पिया!
प्रेम की बाजी ।
7
सँजोए रखे
फूलों से बेहतर
तेरे सितम ।
8
प्रीत निभाती
मरणोपरांत भी
ले आगोश में
9
नश्वर जग
जिन्दगी है बेवफा
मौत सनम ।
10
तमस हटे
आलोकित हो पथ
ज्ञान दीप से
11
बंजारा हूँ मैं
भटकूँ योनियों में
है ठौर कहाँ …??
 12                                     
भीगी पलकें
यादों की महफिल
तन्हा नहीं मैं

ये सभी हाइकु हिंदी हाइकु में प्रकाशित हुए है जिसका लिंक यहाँ दिया गया है

http://hindihaiku.wordpress.com/2013/05/07/5685/#comment-4540