BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

मंगलवार, 25 जून 2013

यात्रा वृतांत




आकाश गंगा
घुमने चल पड़ा
चाँद अकेला | 

है सप्ताहांत
भ्रमणकारी मन
खोजे एकांत | 

यात्रा वृतांत
यादो भरी पोटली
हरते क्लांत | 

यात्रा आरम्भ
बहुतेरे पड़ाव
नहीं विश्राम | 

यात्रा है जारी
कपि मानव कपि
उल्टी है गाड़ी | 


बुधवार, 19 जून 2013

बालिका बधू


 हो गयी बंद
मस्ती की पाठशाला
जीवन शुरू |

ख्वाब थे पाले
महकूँ बन फूल
तोड़े  माली ने |

बालिका बधू
सेंकती बचप
न 
जलते स्वप्न  | 

खूंटे  से बंधे
खींचे गृहस्थी रथ
मासूम कंधे |


मंगलवार, 18 जून 2013

रोया अम्बर



रोया अम्बर 
आंसुओं ने डुबोया 

पूरा शहर  | 



नाचती बुँदे 

दामिनी देती ताल

धरती झूमे | 



बरसा पानी 

याद आ गयी नानी 

बीच  बाजार  | 

चलो तैराए 
चाहतो की तरणी 
स्वप्न सिन्धु में  | 


प्यासी है धरा 

आये न आज फिर 

कारे  बदरा  | 



घिरे बादल 

दे कर आश्वासन 
हुए ओझल  | 

आया सैलाब
बादल  फटा  है  या -
दिल किसी का |

नेह बरसे




सुधा सागर
ममता का आंचल
सुख गागर |

कैसी थी दवा
सूखे थे जख्म सभी 

हो गए जिन्दा ..!!



जिन्दा है  यादे 

साथ जीने के वादे 

मृत है रिश्तें 



ख़्वाबों में तुम 
दिल में  भी तुम हो 
जिन्दा अभी भी ...:)

नन्ही हसती 
बाबुल बचपन 
ज़िंदा करती 

ये लो मैं जीती 
हार के सब कुछ 
दांव प्रीत की 

नेह मिलेगा 
नेह के बदले में 
बांटो जी भर 

प्रेम दीपक 
जले मन मंदिर 
नेह की बाती 

नेह बरसे 
बरसों बाद मिले 
बर्षों बिछड़े 

शनिवार, 15 जून 2013

सुनाये सरगम







जल प्रपात 

सुनाये  सरगम 

मिटाये  ताप

 राफ्टिंग कभी
पर्वत आरोहण
यही जीवन